गाजीपुर। सत्यदेव इंटरनेशनल स्कूल में प्रातःकालीन प्रार्थना सभा के बाद हिंदी एवं अंग्रेजी में इंटर हाउस डिबेट प्रतियोगिता का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। प्रतियोगिता में चारों सदनों के विद्यार्थियों ने सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर वर्गों में भाग लेकर अपनी भाषाई दक्षता, तार्किक क्षमता और अभिव्यक्ति कौशल का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सत्यदेव ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के प्रबंध निदेशक प्रो. डॉ. सानंद सिंह, विद्यालय की प्रबंधक डॉ. प्रीति सिंह, सत्यदेव हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सक डॉ. विशाल सत्यदेव, नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज के प्राचार्य राजकुमार त्यागी तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य चंद्रसेन तिवारी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित और माल्यार्पण कर किया। इसके बाद प्रधानाचार्य की अनुमति से प्रतियोगिता प्रारंभ हुई। अंग्रेजी भाषण प्रतियोगिता का मूल्यांकन मिस आंचल पांडेय तथा हिंदी भाषण प्रतियोगिता का मूल्यांकन सत्यदेव डिग्री कॉलेज के बीएड विभाग की प्रभारी स्मिता सहाय ने किया। मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. सानंद सिंह ने कहा कि प्रभावशाली संवाद और भाषा पर अच्छी पकड़ विद्यार्थियों की सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं। डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देती हैं। प्रधानाचार्य चंद्रसेन तिवारी ने कहा कि मंच पर बोलने का अभ्यास विद्यार्थियों का संकोच दूर कर उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को निखारता है।
प्रतियोगिता के परिणाम..
सब-जूनियर वर्ग –
प्रथम: सरदार पटेल सदन — प्रियांशी चौरसिया एवं परी गुप्ता। – द्वितीय: विवेकानंद सदन — रियांजली यादव एवं मो. आकिफ। – तृतीय: करमवीर सदन — जया एवं आयुष सिंह यादव।
जूनियर वर्ग –
प्रथम: विवेकानंद सदन — आदित्य बिंद एवं हर्षित कुशवाहा। – द्वितीय: अंबेडकर सदन — मानसी उपाध्याय एवं अनुराधा यादव। – तृतीय: सरदार पटेल सदन — चंदनु तिवारी एवं अनुष्का यादव।
सीनियर वर्ग –
प्रथम: अंबेडकर सदन — अंकिता बिंद एवं अंजुम खातून। – द्वितीय: विवेकानंद सदन — जानू यादव एवं आयुष कुशवाहा। – तृतीय: करमवीर सदन — वैष्णवी श्रीवास्तव एवं आदित्य राय।
कार्यक्रम का संचालन कृष मिश्रा एवं श्रेया तिवारी ने किया। अंत में प्रधानाचार्य चंद्रसेन तिवारी ने अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतियोगिता विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा हिंदी और अंग्रेजी भाषा में उनकी दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
