गाजीपुर। आईडीबीआई बैंक में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हिस्सेदारी कनाडा की निजी कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड को बेचने के निर्णय के विरोध में शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू), गाजीपुर के संयोजक सत्येंद्र गुप्ता ने बताया कि यह अभियान सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था की रक्षा के लिए चलाया गया। यूएफबीयू ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की लगभग 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बैंक में आम जनता की करीब 3.50 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है। वहीं, बैंक ने पिछले तीन वर्षों में 22,600 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। ऐसे में लाभ अर्जित कर रहे बैंक को विदेशी निजी निवेशक के हाथों सौंपने के औचित्य पर सवाल उठते हैं। बैंक यूनियनों ने कहा कि वर्ष 2003 में आईडीबीआई के बैंकिंग कंपनी में रूपांतरण के समय संसद में सरकार की ओर से अपनी हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। यूएफबीयू के अनुसार, मौजूदा निर्णय उस आश्वासन के विपरीत है। यूनियन ने निजीकरण के बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और पूर्व सैनिकों के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। यूएफबीयू ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आम नागरिकों की बचत, देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय की नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में आईडीबीआई बैंक को विदेशी निजी निवेशक के हाथों सौंपने का फैसला आत्मनिर्भर भारत की नीति के विपरीत है। यूनियन ने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की। साथ ही स्पष्ट किया कि आगे की परिस्थितियों और घटनाक्रम के अनुसार आंदोलन के अगले कार्यक्रम तय किए जाएंगे। काली पट्टी अभियान को बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की एकजुटता तथा सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था की रक्षा के संकल्प का प्रतीक बताया गया।
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के विरोध में बैंककर्मियों ने बांधी काली पट्टी
