भोजपुरी कवि अनन्तदेव पाण्डेय ‘अनन्त’ को 16 अक्टूबर को दी जाएगी श्रद्धांजलि

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गाजीपुर। भोजपुरी के सुविख्यात कवि अनन्तदेव पाण्डेय ‘अनन्त’ की स्मृति में 16 अक्टूबर को नगर के स्टीमरघाट स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। उनकी लोकप्रिय भोजपुरी कविता ‘गँउवों गाँव बुझाते नइखे’ में ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति और पुरानी परंपराओं का सजीव चित्रण आज भी लोगों के मन में बसा हुआ है। कवि का 3 अक्टूबर 2026 को करीब 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके इकलौते पुत्र गोपाल पाण्डेय ‘गौरव’ ने बताया कि पैतृक गांव पचोखर के रहने वाले अनन्तदेव पाण्डेय ने रेलवे से अपनी नौकरी की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग में सेवाएं दीं। नौकरी के दौरान भी वे जनसरोकारों से जुड़े रहे और सामाजिक समस्याओं, ग्रामीण जीवन तथा अपने दौर की यादों को कविताओं में अभिव्यक्त करते रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उनकी डायरियों और पुस्तकों में करीब 300 कविताएं संकलित रहीं। उनकी रचनाओं में ग्रामीण परिवेश, प्रकृति, सामाजिक कुरीतियों और हास्य-व्यंग्य की झलक मिलती है। वर्ष 2000 में रचित उनकी भोजपुरी कविता ‘गँउवों गाँव बुझाते नइखे’ विशेष रूप से लोकप्रिय हुई। लगभग 50 पंक्तियों की इस कविता में गांव के रहन-सहन, घरेलू उपकरणों, पारंपरिक खेलों और तीज-त्योहारों के माध्यम से बदलते ग्रामीण जीवन को उकेरा गया है। कविता में ओखर-मूसर, कोठिला, हांड़ी-परेई, गगरा-लोटा और गुल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक ग्रामीण जीवन के प्रतीकों का उल्लेख भोजपुरी लोक संस्कृति की मिठास को सामने लाता है। इस कविता संग्रह का प्रकाशन वर्ष 2021 में हुआ था। पुस्तक में डॉ. जितेन्द्रनाथ पाठक, डॉ. विवेकी राय, डॉ. पीएन सिंह, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. हरिकेश सिंह, प्रो. सदानन्द शाही, डॉ. मान्धाता राय सहित 26 प्रख्यात साहित्यकारों के विचार भी शामिल हैं। साहित्य जगत में उनकी रचनाओं को भोजपुरी भाषा और ग्रामीण संस्कृति के दस्तावेज के रूप में देखा जाता है। कवि अनन्त के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है। उनके अंतिम संस्कार में साहित्यकारों, जनसेवकों, व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों, पत्रकारों और नगर के अनेक गणमान्य लोगों सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।