पूर्व सैनिक की पहल और ग्रामीणों के जज्बे से मिली कामयाबी, जनसहयोग से निर्मित पुल का भव्य उद्घाटन

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गाजीपुर। मंगई नदी पर ग्रामीणों के हौसले और जनसहयोग से निर्मित पुल का उद्घाटन रविवार को किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने इस नवनिर्मित पुल का उद्घाटन किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि पूर्व कैप्टन रविंद्र यादव और इस क्षेत्र की जनता ने जो मिसाल पेश की है, वह काबिले तारीफ है। यह पुल सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि लोगों के अटूट विश्वास और एकता का प्रतीक है। कयामपुर का यह पुल अब न केवल राहगीरों का रास्ता आसान करेगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी देगा कि यदि समाज ठान ले, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने ही साल 2024 में इस पुल का शिलान्यास भी किया था। लगभग दो साल पहले शुरू हुआ यह पुल निर्माण अब पूरा हो गया है। क्यामपुर छावनी स्थित यह पक्का पुल जन सहयोग से करोड़ों की लागत से तैयार हुआ है। यह पुल आसपास के कई गांवों को आपस में जोड़ेगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा होगी। उद्घाटन समारोह में पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा और सपा नेता राजकुमार पांडेय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व ब्लॉक प्रमुख रामकृत यादव ने की। इस दौरान रविंद्र यादव के अलावा कालिका यादव, रमाकांत यादव, रमेश राजभर, रामबदन, राजेश कुशवाहा, मदन यादव समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

इस पहल की शुरुआत सेना से रिटायर्ड रविंद्र यादव के 10 लाख रुपए के योगदान से हुई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने 25 फरवरी 2024 को इस पुल का शिलान्यास किया था। इसके बाद से स्थानीय लोगों का आर्थिक सहयोग लगातार मिलता रहा, जिससे पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। पुल की डिजाइनिंग और निर्माण कार्य की देखरेख इंजीनियरिंग कोर से रिटायर्ड रविंद्र यादव और एक आर्किटेक्ट ने की। स्थानीय लोगों के अनुसार, आजादी के बाद से ग्रामीण पुल के लिए शासन-प्रशासन से लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। पुल न होने के कारण लोग आवागमन के लिए बांस के पुल का सहारा लेते थे और बाढ़ के समय छोटी नावों का उपयोग करना पड़ता था। पुल के अभाव में जिला मुख्यालय की दूरी 10-12 किलोमीटर बढ़ जाती थी। थाना मात्र 3 किलोमीटर दूर होने के बावजूद सड़क मार्ग से जाने में 15 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। यह गांव जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के गांव के पास ही स्थित है। ग्रामीणों की यह पहल बिहार के दशरथ मांझी के उस जज्बे की याद दिलाती है, जिन्होंने अकेले पहाड़ काटकर रास्ता बनाया था।

रविंद्र यादव की पहल हुई सफल: सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद रविंद्र यादव जब अपने गांव पहुंचे, तो उन्होंने ग्रामीणों की आवागमन की समस्या देखी। इसके बाद उन्होंने पुल निर्माण का संकल्प लिया और अपनी ओर से 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। रविंद्र यादव सेना के इंजीनियरिंग कोर में कार्यरत रह चुके हैं और सिविल जेई डिप्लोमा धारक हैं। उन्होंने बताया कि पुल का डिजाइन और निर्माण कार्य एक अन्य आर्किटेक्ट की देखरेख में किया गया है। उनका गांव गाजीपुर जनपद में है, जो लोकसभा बलिया और विधानसभा मोहम्मदाबाद के अंतर्गत आता है। उनके गांव के पास ही जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का गांव भी है। ग्रामीणों ने बताया कि मंगई नदी में बाढ़ आने पर पहले नाव ही 14 से 15 गांवों के लोगों के लिए आवागमन का एकमात्र साधन थी। अब इस पुल के बनने से यह समस्या दूर हो गई है।