गाजीपुर। जिले में नदी, तालाब और अन्य जलाशयों में डूबने से लगातार हो रही जनहानि को लेकर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को संवेदनशील घाटों एवं जलाशयों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने दुर्घटना बाहुल्य घाटों को चिन्हित कर 15 दिनों के भीतर चेन बैरियर, फ्लोटिंग बैरियर या अन्य सुरक्षा अवरोध लगाने को कहा है।
प्रमुख और संवेदनशील घाटों पर पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ उनके नाम और मोबाइल नंबर की तहसीलवार सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा दुर्घटना बाहुल्य घाटों और तालाबों के किनारे बड़े लाल रंग के चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। इन पर ‘दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र’ और ‘पानी में अधिक गहराई तक जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है’ जैसी चेतावनियां स्पष्ट रूप से अंकित होंगी।
डूबने से जनहानि होने पर मृतक के परिजनों को नियमानुसार आपदा राहत कोष से अनुमन्य सहायता तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र परिवारों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। डीएम ने सिविल डिफेन्स, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से घाटों पर जनजागरूकता अभियान चलाने तथा बच्चों को जलाशयों के पास अकेले न जाने और गहरे पानी में न जाने के लिए लोगों को जागरूक करने को कहा है।
संवेदनशील स्थानों पर पुलिस गश्त, 112 वाहनों की प्रभावी मूवमेंट और भीड़ वाले अवसरों पर अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। आगामी पर्व-त्योहारों को देखते हुए घाटों पर बैरियर, चेतावनी बोर्ड, गोताखोर, पुलिस बल और प्रकाश व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी एसडीएम को स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का सत्यापन करना होगा। डीएम ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के कारण डूबने से जनहानि होने पर संबंधित उपजिलाधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर भी उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा। निर्देशों के अनुपालन में किसी भी स्तर की शिथिलता को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी गई है।
