10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन

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गाजीपुर। मेरठ की दलित छात्रा के बलात्कार और हत्या के दोषियों को दंडित करने तथा लोकतांत्रिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की सरकार की कार्रवाइयों के विरोध में यह धरना प्रदर्शन जिला मुख्यालय स्थित सरयू पाण्डेय पार्क में आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता भाकपा-माले नेता आजाद यादव ने की, जबकि संचालन योगेन्द्र भारती ने किया। इसमें भाकपा-माले कार्यकर्ताओं के साथ-साथ सीपीआई(एम) नेता नसीरुद्दीन भी शामिल हुए। इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के अधीन अपराधी और दबंग बेलगाम हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों और महिलाओं के साथ आए दिन हिंसक घटनाएं हो रही हैं, और पुलिस प्रशासन पीड़ितों को ही प्रताड़ित कर रहा है। नेताओं ने मेरठ में दलित छात्रा के बलात्कार और हत्या के दोषियों को दंडित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वालों पर पुलिसिया दमन की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट करता है कि योगी प्रशासन में अपराधियों को खुली छूट मिली हुई है। वक्ताओं ने मोदी-योगी शासन पर नागरिकों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार धरना-प्रदर्शनों से डरकर नेताओं और कार्यकर्ताओं को ‘हाउस अरेस्ट’ जैसी असंवैधानिक कार्रवाई कर रही है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे इससे दबने वाले नहीं हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने दस सूत्रीय मांगें रखीं। इनमें प्रदर्शनकारियों से मारपीट करने वाले मेरठ के एसएसपी अविनाश पाण्डेय को बर्खास्त करने, नेताओं और कार्यकर्ताओं की गैर-कानूनी ‘हाउस अरेस्टिंग’ रोकने, नीट पेपर लीक के जिम्मेदार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की मांग शामिल थी। अन्य मांगों में अयोध्या मंदिर में चढ़ावा चोरी के जिम्मेदार चंपत राय सहित सभी दोषियों को दंडित करना और बुलडोजर व एनकाउंटर राज पर अंकुश लगाना शामिल था। सभा को भाकपा-माले की राज्य कमेटी सदस्य राजेश वनवासी, मंजू गोंड़, जोखू प्रसाद, मनोज कुशवाहा, प्रदीप कुमार और प्रमोद कुशवाहा सहित कई अन्य लोगों ने भी संबोधित किया।